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रुपये-पैसे से जुड़ी ये हैं 5 झूठ , आप भी मानते है इन्हें सच

लोगों में रुपये-पैसे से जुड़ी कई गलतफहमी होती हैं. इसके चलते वे सही आर्थिक फैसले नहीं ले पाते हैं. इसका उन्हें नुकसान होता है. यहां हम ऐसी ही कुछ गलतफहमियों और उनके सच के बारे में बता रहे हैं. इंश्योरेंस की ऑनलाइन खरीद से आपको अच्छी डील मिलती है सच : इंश्योर्ड वैल्यू घटने या फिर प्लान फीचर में बदलाव किए जाने से प्रीमियम कम हो सकता है. टर्म प्लान सस्ते होते हैं और इन्हें ऑनलाइन खरीदने पर खर्च काफी कम हो जाता है. हालांकि, मेडिकल, व्हीकल या ट्रैवल पॉलिसी खरीदने में आपको शायद इस तरह का डिस्काउंट नहीं मिले. ... Read moreरुपये-पैसे से जुड़ी ये हैं 5 झूठ , आप भी मानते है इन्हें सच
 
रुपये-पैसे से जुड़ी ये हैं 5 झूठ , आप भी मानते है इन्हें सच

लोगों में रुपये-पैसे से जुड़ी कई गलतफहमी होती हैं. इसके चलते वे सही आर्थिक फैसले नहीं ले पाते हैं. इसका उन्‍हें नुकसान होता है. यहां हम ऐसी ही कुछ गलतफहमियों और उनके सच के बारे में बता रहे हैं.

  1. इंश्‍योरेंस की ऑनलाइन खरीद से आपको अच्‍छी डील मिलती है

सच : इंश्‍योर्ड वैल्‍यू घटने या फिर प्‍लान फीचर में बदलाव किए जाने से प्रीमियम कम हो सकता है.

टर्म प्‍लान सस्‍ते होते हैं और इन्‍हें ऑनलाइन खरीदने पर खर्च काफी कम हो जाता है. हालांकि, मेडिकल, व्‍हीकल या ट्रैवल पॉलिसी खरीदने में आपको शायद इस तरह का डिस्‍काउंट नहीं मिले. भले ऑनलाइन डिस्‍ट्रीब्‍यूटर दावा करें कि आप मोटर इंश्‍योरेंस ऑनलाइन खरीदने पर बड़ी बचत कर सकते हैं. लेकिन, अक्‍सर कम प्रीमियम की वजह इंश्‍योर्ड डेक्‍लेयर्ड वैल्‍यू में कटाैती हो सकती है. अगर आप मेडिकल या कार इंश्‍योरेंस ऑनलाइन खरीद रहे हैं तो नई पॉलिसी के फीचर चेक करना नहीं भूलें.

  1. सिप में आप पैसा नहीं गंवा सकते हैं

सच : सिप सिर्फ इक्विटी में निवेश का जोखिम कम करता है. लेकिन, इसे खत्‍म नहीं करता है.

सिस्‍टेमैटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान यानी सिप बाजार की अस्थिरता से बचाता है. यह समय गुजरने के साथ खर्च की औसत कीमत पाने में मदद करता है. लेकिन, यह नुकसान से बचने की गारंटी नहीं है. सिप इक्विटी में निवेश का जोखिम कम जरूर करता है. लेकिन, खत्‍म नहीं करता है. सिप अनुशासन पैदा करता है. अलग-अलग मार्केट साइकिल में निवेश रहने से आपको फायदा होता है.

  1. इंश्‍योरेंस से मिली टैक्‍स-फ्री रकम मुख्‍य बेनिफिट है

सच : अगर निवेश महंगाई की दर से कम रिटर्न देता है तो इंडेक्‍सेशन उसे टैक्‍स-फ्री कर देता है.

इंश्‍योरेंस कंपनियां और डिस्‍ट्रीब्‍यूटर इंश्‍योरेंस पॉलिसियों की मैच्‍योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्‍स फ्री होने का खूब ढिंढोरा पीटते हैं. हालांकि, यह कोई बड़ी बात नहीं है. कोई भी निवेश जो महंगाई की दर से कम कमाता है, अगर इंडेक्‍सेशन के लिए पात्र है तो वह ऐसे भी टैक्‍स फ्री बनाया जा सकता है. होल्डिंग पीरियड के दौरान इंडेक्‍सेशन महंगाई की दर को ध्‍यान में रखता है. उसी के अनुसार खरीद की लागत एडजस्‍ट कर दी जाती है.

  1. कई क्रेडिट कार्ड होने से आप कर्ज में फंस सकते हैं

सच : क्रेडिट कार्ड की संख्‍या का आपके खर्च से लेना देना नहीं है

कई लोगों को लगता है कि एक से अधिक क्रेडिट कार्ड होने से खर्चों में बढ़ोतरी होती है. लेकिन, यह सच नहीं है. यह पूरी तरह से किसी व्‍यक्ति पर निर्भर करता है. सच तो यह है कि कई क्रेडिट कार्ड होने के फायदे भी हैं. इससे आपको ज्‍यादा क्रेडिट लिमिट मिलती है.

  1. ऑनलाइन मेगा सेल में शानदार डिस्‍काउंट मिलता है

सच : यह रूटीन सेल के दौरान मिलने वाले डिस्‍काउंट जैसा होता है.

ई-कॉमर्स पोर्टल आपको मेगा सेल के दौरान जिस तरह का डिस्‍काउंट देने का यकीन दिलाते हैं, वास्‍तव में वह वैसा नहीं होता है. एक अध्ययन में पाया गया कि सेल के दिनों में शॉपिंग वेबसाइटों पर प्रोडक्‍टों का औसत बिक्री मूल्य सामान्य दिनों से केवल 17 फीसदी कम है. नहीं बिके हुए स्टॉक को निकालने के लिए पूरे साल चलने वाली नियमित बिक्री को देखते हुए यह बड़ी कटौती नहीं कही जा सकती है.

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