पर्यावरण प्रदुषण पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi

पर्यावरण प्रदुषण पूरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में सभी का जानना आवश्यक है। प्रदूषण का कारण, रोकथाम आदि के बारे में हम सभी को ज्ञान होना चाहिए।

पर्यावरण प्रदुषण पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi

image source – Jagran Josh

पर्यावरण प्रदुषण पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi

सबसे पहले हम प्रदूषण का अर्थ जान लेते हैं। इसका अर्थ है पर्यावरण को गंदा करना। हम लोग एक बहुत गन्दे पर्यावरण से घिरे हुए हैं और इसका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस भयंकर सामाजिक समस्या का मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण वनों की कटाई और शहरीकरण प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उत्पाद जो की सामान्य जीवन की दैनिक जरूरतों के रूप इस्तेमाल की जाती है. रास्तो पर गाडियों का ज्यादा उपयोग होने से पेट्रोल और डीजल का भी ज्यादा से ज्यादा अपव्यय होगा और गाडियों से निकलने वाले धुए से वायु प्रदुषण होता है।

पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन है जहाँ जिंदगी जीने के सभी संशाधन उपलब्ध हैं।हम यहीं जीते और इसी को गंदा करते हैं पर ये गलत चीज़ है। अगर हम यहाँ रह रहें हैं तो ये हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम इसको स्वच्छ और साफ़ रखें। जिस तरह हम अपने घर को अच्छे से साफ ढंग से रखते हैं उसी तरह इसको भी साफ रखने का हक़ हमारा ही है। लेकिन हम अपने दैनिक कामो को चलते इतने व्यस्त हो गये की हम हमारी जिम्मेदारियों को ही भूल गये. साफ़ पानी और शुद्ध हवा हमारी स्वस्थ जिंदगी के लिये बहोत जरुरी है. लेकिन आज के आधुनिक युग में इन दो में से एक भी संसाधन साफ़ और शुद्ध नही।और अगर ऐसा ही रहेगा तो हम अपनी ज़िंदगी से हाथ धो बैठेंगे।

प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं जैसे वायु प्रदूषण / Air Pollution , ध्वनि प्रदूषण / Sound Pollution, जल प्रदूषण / Water Pollution , भूमि प्रदूषण / Land pollution और इन सबके अलग अलग कारण हैं। जैसे वायु प्रदूषण का कारण है कारखानों से निकलने वाला धुंआ, वाहनों से निकलने वाला धुँआ आदि। ध्वनि प्रदूषण का कारण है मोटरों और वाहनों से होने वाली आवाज़ें, तेज़ आवाज़ में लाउड स्पीकर का चलाना आदि। जल प्रदूषण का मुख्य कारण है कारखाने से निकलने वाले ज़हरीले पदार्थ जो नदियां में जाते हैं, नदियों में गन्दे कपड़ो का धोना आदि ये सब जल को बहुत प्रदुषित करते हैं।

पर्यावरण प्रदुषण विषय पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi

Paryavaran Pradushan

उद्योगों में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है और इस प्रक्रिया में केमिकल, विषैले पदार्थ और गैस का उपयोग किया जाता है जो मानवी स्वास्थ के लिये हानिकारक होते है। इससे प्रकृति में विभिन्न प्रकार की समस्याये उत्पन्न होती है जैसे की  ग्लोबल वार्मिंग / Global Warming, जल प्रदुषण /  Water Pollution , वायु प्रदुषण / Air Pollution इत्यादि। पिछले एक दशक में प्राकृतिक प्रदूषक का स्तर बहोत बढ़ा है। सभी प्रकार के प्रदूषण बेशक पूरे पर्यावरण और इकोसिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं मतलब जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।मनुष्य की मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है।

पृथ्वी पर हर तरह की गैस का संतुलन बना रहना बहुत ज़रूरी है।और ये पेड़ो से ही सम्भव है।पर हम लोग तो पेड़ों को ही काटते जा रहे हैं।जरा सोचिये की यदि इस ग्रह पर पेड़ ही न रहे तो क्या होगा, पेड़ हमारे द्वारा छोड़ी गयी गैस कार्बोन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते है और ओक्सिज़न को छोड़ते है।यदि पेड़ इस दुनिया में नही होंगे तो वातावरण में कार्बोन डाइऑक्साइड का प्रमाण बढ़ जायेगा. और इससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ जायेगा।प्राकृतिक संसाधनों के साथ छेड़-छाड़ करने से प्राकृतिक आपदाये भी आ सकती है। आज के आधुनिक युग में हमने औद्योगिक विकास तो कर ही लिया है लेकिन प्राकृतिक विकास हम नही कर पाये।हम औद्योगिक विकास करने के चक्कर में हमारी प्रकृति को ही भूल गये। और इसी वजह से आज दुनिया में अलग-अलग तरह की बीमारिया उत्पन्न हो रही है। औद्योगीकरण की वजह से जीवन रक्षा प्रणाली तेजी से जीवन विनाशी प्रणाली में परिवर्तित हो रही है।

पर्यावरण प्रदुषण विषय पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi

Paryavaran Pradushan

 

हम मनुष्य ही प्रदूषण को बढ़ावा दिए हुए हैं अगर हम चाहें तो इस प्रदूषण को कंट्रोल में ला सकते हैं।इसके लिए हमें कारखानों को शहरों या रहने वाली जगहों से दूर बनाना होगा जिससे उनका धुँआ रहने वाली जगह की हवा को दूषित न कर सके।और उससे निकलने वाले गन्दे पानी के लिए हमे नालों का निर्माण करना होगा जिससे जो भी गन्दे पदार्थ और केमिकल्स पानी के साथ निकलते हैं वो गन्दे नालों में ही जाएं। इससे नदियां स्वच्छ रहेंग और जो जानवर नदी का पानी पियेंगे वो भी सुरक्षित रहेंगे।और हम लोगों को कारों और भी धुँए वाले वाहनों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए। टीबी, रेडियो, लाउड स्पीकर आदि को धीमा ही चलाना चाहिए। इन सबको करने से हम प्रदूषण को कंट्रोल में ला सकते हैं।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है। प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है।सामुहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहोत ज्यादा भुगतेगी।

आजकल की व्यस्त ज़िन्दगी में हम आसपास के वातावरण के बारे में भूल ही गए हैं।और यही कारण है कि हम प्रदूषित जैसे एक बड़े मुद्दे पर ज्यादा ध्यान नहीं देते है। हमें दूषित चीज़ो से बचना होगा।हम लोगों को अपने आसपास सफाई रखनी होगी।तथा लोगों को जागरूक करना होगा तभी हम प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या से आज़ाद हो सकते हैं।

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