मुग़ल शासक हुमायूँ का इतिहास | Humayun History In Hindi

दोस्तों आज हम मुग़ल शासक हुमायूँ के बारे में बात करेंगे Humayun History In Hindi के अलावा हम इस पोस्ट में Humayun’s death और Humayun story In Hindi भी बताएंगे.

मुग़ल शासक हुमायूँ का इतिहास | Humayun History In Hindi

मुग़ल शासक बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने 1530 में भारत की राजगद्दी संभाली और उनके सौतेले भाई कामरान मिर्ज़ा ने काबुल और लाहौर का शासन ले लिया। बाबर ने मरने से पहले ही इस तरह से राज्य को बाँटा ताकि आगे चल कर दोनों भाइयों में लड़ाई न हो। कामरान आगे जाकर हुमायूँ के कड़े प्रतिद्वंदी बने। हुमायूँ का शासन अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के हिस्सों पर 1530-1540 और फिर 1555-1556 तक रहा।

भारत में उन्होने शेरशाह सूरी से हार पायी। दस साल बाद, ईरान साम्राज्य की मदद से वे अपना शासन दोबारा पा सके। इस के साथ ही, मुग़ल दरबार की संस्कृति भी मध्य एशियन से इरानी होती चली गयी। हुमायूँ के बेटे का नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था। हुमायूँ की जीवनी का नाम हुमायूँनामा है जो उनकी बहन गुलबदन बेग़म ने लिखी है। इसमें हुमायूँ को काफी विनम्र स्वभाव का बताया गया है और इस जीवनी के तरीके से उन्होंने हुमायूँ को क्रोधित और उकसाने की कोशिश भी की है।

हुमायुँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल में हुआ था हुमायुँ के तीन भाई कमरान, असकरी व हिंदाल थे तथा बहन गुलबदन बेगम थी। हुमायुँ की माता माहम बेगम (शिया मतावलंबी) हिरातके हुसैन बेकरा की पुत्री थी

हुमायुँ ने गद्दी पर बैठने के बाद अपना सारा साम्राज्य अपने भाईयों के बीच बाँट दिया ये इसकी सबसे बडी प्रशासनिक भूल भी थी। बाद में उनके भाई ही हुमायूँ के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी साबित हुए।

चौसा का युद्ध / Battle of Chausa In Hindi

26 जून, 1539 को हुमायूँ और शेर खाँ (शेरशाह सूरी) के बीच चौसा नामक स्थान पर ‘चौसा का युद्ध‘ [ Battle of Chausa ] लड़ा गया. इस युद्ध में हुमायूँ बुरी तरह पराजित हुआ। इस जीत से खुश होकर शेर खाँ ने अल-सुल्तान-आदिल या शेरशाह की उपाधि धारण की और अपने नाम के सिक्के जारी किये और खुतबा (प्रसंशा का भाषण) भी पढ़वाया।

सरहिंद का युद्ध / Battle of Sirhind

(22 जून, 1555 ई.) – इस संघर्ष में अफ़ग़ान सेना का नेतृत्व सुल्तान सिकन्दर सूर एवं मुग़ल सेना का नेतृत्व बैरम ख़ाँ ने किया। इस संघर्ष में अफ़ग़ानों की पराजय हुई। 23 जुलाई, 1555 ई. के शुभ क्षणों में एक बार पुनः दिल्ली के तख्त पर हुमायूँ को बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

Humayun’s death / हुमायूँ की मृत्यु 

दूसरी बार हुमायूँ तख्त और राजपाठ का सुख ज्यादा दिन न भोग सका 27 जनवरी, 1556 को दिल्ली के किले दीनपनाह के शेरमंडल नामक पुस्कालय की सीढ़ी से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हो गयी। हुमायूँ को दिल्ली में ही दफनाया गया। दिल्ली में यमुना नदी के किनारे 1535 ई० में हुमायूँ ने ही ‘दीन-पनाह‘ नामक नये शहर की स्थापना की थी। हुमायूँ की मृत्यु के पश्चात 1556 में उसका पुत्र अकबर मुग़ल साम्राज्य का सम्राट बना।

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