डॉन “मन्या सुर्वे” | Manya Surve History

1970 से 80 के दशक में Manya Surve मुंबई का सबसे पावरफुल गैंगस्टर था। आज इस पोस्ट में हम Manya Surve की History के बारे में पढने वाले है। उस वक़्त हर जगह सिर्फ मान्या का खौफ था। लोगों के बीच उसका डर फैला हुआ था, लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि मान्या सुर्वे असल में दाऊद इब्राहिम और उसके बड़े भाई सबीर इब्राहिम का सबसे बड़ा दुश्मन था। मान्या ने दाऊद और अफगानी माफिया के खिलाफ लंबे समय तक लड़ाई लड़ी थी।

Manya_Surve in hindi

मन्या सुर्वे का जन्म 1944 में भारत में महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी कोकण क्षेत्र के पावस जिले के रंपर गाँव में हुआ था। 1952 में सुर्वे अपनी माँ और बड़े पिताजी के साथ मुंबई रहने के लिए आ गया था। मुंबई आने के बाद कई सालो तक वह लोवर परेल की चौल में रहने लगा था।

डॉन “मन्या सुर्वे” – Manya Surve History in Hindi

मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे था चूंकि गैंग के साथी उसे मान्या पुकारते थे इसलिए पुलिस रिकॉर्ड में भी उसका नाम मान्या सुर्वे दर्ज हो गया। उसकी परवरिश मुंबई में ही हुई। मुंबई के कीर्ति कॉलेज से ग्रैजुएशन (BA) किया और जब वह अपराध की दुनिया में आया तो उसने अपने साथ पढ़े दोस्तों को भी गैंग में शामिल कर लिया। मान्या को अपराध की दुनिया में लाने वाला उसका सौतेला भाई भार्गव दादा था। उस वक्त भार्गव की मुंबई के दादर इलाके में खासी दहशत थी। मान्या सुर्वे ने साल 1969 में किसी दांदेकर का मर्डर किया और उम्र कैद की सजा पाकर यरवदा जेल चला गया।

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कारावास

पुणे की यरवदा जेल में मान्या का दबदबा बढ़ने लगा और वह पहले से ज्यादा खूंखार हो गया। इसके बाद उसे रत्नागिरी जेल में शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां उसने भूख हड़ताल कर दी, तबीयत बिगड़ने पर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया जहां 14 नवंबर 1979 को पुलिस को चकमा देकर मान्या फरार हो गया।

डॉन “मन्या सुर्वे” – Manya Surve History in Hindi

जेल से निकलने के बाद मन्या ने एक प्लाट ले लिया था और फिर मन्या ने सरकारी मिल्क स्कीम की बोली के पैसो को लूटा और मुंबई अंडरवर्ल्ड में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद इसी गैंग ने दयानंद, परशुराम काटकर और किशोर सावंत के साथ मिलकर महिम के बादल बिजली बरखा के पास एक कार की चोरी की।

मन्या सुर्वे द्वारा की गयी एक और चोरी में कैनरा बैंक से चुराए गये 1.6 लाख भी शामिल है। लेकिन धीरे-धीरे मन्या सुर्वे की आतंकी गतिविधियाँ बढ़ने लगी। इन सबसे परेशान होकर मुम्बई पुलिस ने सभी गैंग को ख़त्म करने का ऑपरेशन शुरू कर दिया। मुम्बई पुलिस एक- एक करके सभी गैंगस्टर का एनकाउंटर करने लग गयी जिसमें मान्या भी शामिल था।

मान्या सुर्वे का एनकाउंटर – 

11 जनवरी 1982 को मुम्बई के कल्याण इलाके के टैक्सी स्टैंड पर जब मान्या अपनी गर्लफ्रैंड से मिलने के लिए आया हुआ था उसी समय पुलिस ने उसे चारों तरफ़ से घेर लिया । अपने आपको चारों तरफ से घिरा देखकर मान्या ने अपनी रिवाल्वर निकालकर पुलिस पर हमला करना चाहा ,लेकिन उससे पहले ही पुलिस की गोली ने उसे मौत के घाट उतार दिया। कहा जाता है कि मान्या के एनकाउंटर के पीछे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद का हाथ था, क्योंकि उस समय मान्या का सबसे बड़ा दुश्मन दाऊद ही था। दाऊद ने ही मान्या के टैक्सी स्टैंड पर होने की जानकारी पुलिस को दी थी।

मन्या सुर्वे फिल्म –

Manya Surve film

मन्या सुर्वे के जीवन पर आधारित 2013 में एक फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ बनायी गयी जिसमे जॉन अब्राहम ने मन्या सुर्वे का किरदार निभाया था। इस फिल्म में मन्या सुर्वे के जीवन को पूरी तरह से सही तो नही दिखाया गया लेकिन इसी फिल्म में उसके बारे में काफी कुछ बताया गया है।

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