शिक्षक दिवस भाषण व निबंध / Teacher’s Day speech and essay in Hindi

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर को हुआ था। और इन्होंने अपना पूरा योगदान शिक्षा को दिया था। और इन्हीं के जन्मदिन को हम लोग Teacher’s Day / Teacher’s Day के रूप में मनाते हैं। उनका मानना था कि यदि शिक्षा सही तरीके से दी जाए तो समाज की कई बुराइयों को मिटाया जा सकता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के व्यक्तित्व का ही असर था कि 1952 में आपके लिये संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का पद सृजित किया गया।
 
 
Teacher's Day speech and essay in Hindi
 

शिक्षक दिवस भाषण व निबंध / Teacher’s Day speech and essay in Hindi

वो एक ज्ञान के सागर थे। एक बार की बात है। प्रीतिभोज के समय एक अंग्रेज ने अंग्रेजों की तारीफ करते हुए बोला कि -“ईश्वर अंग्रज़ों को बहुत प्यार करता है।इसी वजह से हम गोरे और सुंदर हैं। वहीं पर डॉ. राधाकृष्णन भी मौजूद थे और ये सुनने के बाद उन्होंने सभी को एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बोला कि-

 
“मित्रों एक बार ईश्वर का रोटी बनाने का मन हुआ और जब उन्होंने पहली रोटी सेकी तो वो ज्यादा सिक गयी और जल गई जिसकी वजह से निग्रो लोग पैदा हुए।फिर ईश्वर ने दूसरी रोटी सेकी और वो उन्होंने कम ही सेकी और रोटी कच्ची ही रह गयी जिसकी वजह से अंग्रेज़ो का जन्म हुआ।फिर ईश्वर एकदम चौकन्ने हो गए। वो ठीक से रोटी बनाने लगे और इस बार रोटी न ज्यादा सिकी हुई थी और न ही कम एकदम हिसाब से सिकी हुई थी। इसीलिए हम भारतीयों का जन्म हुआ। इतना सुनते ही उस अंग्रेज़ की बोलती बंद हो गई और सभी लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे।

 

शिक्षक दिवस / Teacher’s Day मनाने की शुरुआत

 
स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति जब 1962 में राष्ट्रपति बने तब कुछ शिष्यों ने एवं प्रशंसकों ने उनसे निवेदन किया कि  वे उनका जनमदिन शिक्षक दिवस / Teacher’s Day के रूप में मनाना चाहते हैं। तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा कि मेरे जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करूंगा। तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा से ही व्यक्ति का चरित्र निर्माण हो सकता है।उनको हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत रत्न से सम्मानित किया था।डॉ. राधाकृष्णन कहते थे कि-

“पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों  के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।”

मित्रों, महामहीम राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के महान विचारों को ध्यान में रखते हुए  शिक्षक दिवस / Teacher’s Day  के पुनीत अवसर पर हम सब ये प्रण करें कि शिक्षा की ज्योति को ईमानदारी से अपने जीवन में आत्मसात करेंगे क्योंकि शिक्षा किसी में भेद नही करती. जो इसके महत्व को समझ जाता है वो अपने भविष्य को सुनहरा बना लेता है।शिक्षा से ही व्यक्ति की अलग पहचान होती है।और किसी भी व्यक्ति को जो महान बनाता है वो होता है शिक्षक। अतः अंत में हम सभी शिक्षकों को कुछ शब्दों से प्रणाम करते हैं.

 
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