अगर आपको भी दिखाई दे ये लक्षण, तो हो जाइये सावधान, हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

एक्ज़िमा एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें रोगी की स्थिति अति कष्टपूर्ण होती है। इस रोग की शुरुआत में रोगी को तेज़ खुजली होती है तथा बार-बार खुजाने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं। इन फुंसियों में भी खुजली और जलन होती है तथा पकने पर उनमें से मवाद बहता रहता है और फिर यह जख्म का रूप ले लेता है। एक्ज़िमा शरीर के किसी भी भाग में एक गोलाकार दाने के रूप में पैदा होता है जिसमें हर समय खुजली होती रहती है। मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेज़ी से शरीर में फैलता है। कब्ज़,हाज़मे की खराबी आदि और भी कारण से एक्ज़िमा हो सकता है। इस रोग में सफाई रखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह संक्रमित रोग है। एक्ज़िमा में रोगी को खून साफ़ करने वाली औषधियों का प्रयोग करने के साथ-साथ नहाने के पानी में नीम की पत्तियां या एंटीसेप्टि- क लिक्विड डालकर नहाना चाहिए। रोगी को खट्टी-मीठी वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

एक्जिमा के लक्षण

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समय के साथ त्वचा मोटी हो सकती है और त्वचा में परतदार या कठोरता का अनुभव हो सकता है। अंगुलियों, पैर की अंगुली, हथेलियों और पैरों के तलवों पर तरल द्रव से भरे फफोले उभर सकते हैं। प्रभावित त्वचा को खरोंचने पर छोटे घाव दिखाई दे सकते हैं, और उनसे तरल पदार्थ का रिसाव भी हो सकता है। बच्चों को अकसर सिर की त्वचा पर और गाल पर दाग (लाल धब्बे) मिल सकते है। लाल चकते अकसर कोहनी या घुटनों की सिकुड़न वाले भाग और गर्दन में होते है।

लाल दाग वाली त्वचा में हल्की या गहरी सिकुड़न आना तथा त्वचा मोटा हो सकती है। धब्बों को खरोंचने से त्वचा संक्रमित हो सकती है, अर्थात खुजली फैल सकती है। चलने के दौरान पैरों के निचले भाग में सूजन हो सकती है। पैरों में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है।त्वचा पर द्रव से भरे फफोले उत्पन्न हो सकते हैं, जिनसे द्रव का रिसाव हो सकता है। हाथ लाल होना तथा हाथ में खुजली हो जाना। वेरीकोस वेंस (जिसमे पैरों की नसे एक जगह पर इकट्ठी हो जाती है) की भी संभावना उत्पन्न हो सकती है।

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