चाणक्य ने कहा था सिर्फ मुर्ख लोग ही इन 2 बातों के लिए दुखी होते हैं

जीवन को किस तरह बेहतर बनाया जाए, दूसरों की किस तरह मदद की जाए इसे लेकर आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। आज भी इन नीतियों को पढ़कर यह नहीं कहा जा सकता कि ये कभी दुनिया के लिए बेकार होंगी। एक श्लोक में चाणक्य ने बताया है कि मनुष्य को जीवन में इन दो चीजों को लेकर कभी भी दुखी नहीं होना चाहिए।

चाणक्य बताते हैं कि इस दुनिया में सभी कभी न कभी बीमार जरूर पड़ते हैं। कोई ऐसा नहीं है, जो कभी भी बीमार न पड़ा हो। जिस तरह जन्म और मृत्यु सत्य है, उसी तरह बीमार होना भी शाश्वत सत्य है। शरीर में रोग का होना स्वभाविक है। इसीलिए रोग की स्थिति में कभी भी बहुत ज्यादा चिंतित या विचलित नहीं होना चाहिए।

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जीवन की अन्य चीजों की तरह दुख भी इंसान के जीवन में आता-जाता रहता है। अपने आपको दुखी रखने वाला इंसान किसी भी काम को सही तरीके से सफलता नहीं प्राप्त कर सकता। वो हमेशा अपने दुखों में घिरा रहता है।

इसीलिए दुख आने पर घबराना नहीं चाहिए। और जल्द से जल्द अपने आपको दुख के साए से बाहर निकालना चाहिए।

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