छोटे शहरों में 1.5 लाख नई नौकरियों के मौके, जानें कहां हैं अवसर

कोरोना संकट ने नौकरी बाजार में भी बड़ा बदलाव ला दिया है। बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहर विभिन्न क्षेत्रों के लिए रोजगार के बड़े गंतव्यों के रूप में उभर रहे हैं। स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन खुलने के बाद से छोटे शहरों में एंट्री और जूनियर लेवल जॉब के अवसर बढ़े हैं। ऐसा घर से काम करने के चलन (वर्क फ्रॉम होम कल्चर) और मेट्रो और बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में अनलॉक के बाद तेजी से मांग बढ़ने से हुआ है। इस मौके को भुनाने के लिए कंपनियां छोटे शहरों पर फोकस कर रही हैं। कंपनियों की वेबसाइट और कई नियुक्ती फर्म के अनुसार, मौजूदा समय में छोटे शहरों में करीब 1.5 लाख एंट्री और जूनियर लेवल की नौकरियां हैं। बाजार विशेषज्ञ का मनना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि नौकरी के अवसर छोटे शहरों में पैदा करने के लिए सरकार भी बड़ा निवेश इंफ्रा प्रोजेक्ट के माध्यम से कर रही हैं। इसका असर जॉब मार्केट पर दिखना तय है।

कंपनियों का रुझान क्यों बदला

कोरोना के चलते दुनिया सहित भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। हालांकि, अनलॉक होने के साथ जो सुधार हो रहा है वह बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में तेजी से हो रहा है। छोटे शहरों में मांग भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के मुकाबले अगस्त में सुधार को देंखे तो छोटे शहरों में इसकी रफ्तार 31 फीसदी तो बड़े शहरों में 22 फीसदी रही है। यानी, बड़े शहरों के मुकाबले कंपनियां के लिए अवसर छोटे शहरों में है। इसी को देखते हुए कंपनियों ने छोटे शहरों में अपने कारोबार को विस्तार देना और रोजगार देना शुरू किया है।

कम लागत भी बड़ी वजह

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के बाद कंपनियां अपना परिचालन लागत कम कर रही हैं। इसके लिए वह वर्क फ्रॉम होम के साथ कम वेतन वाले कर्मचारी को नियुक्त कर रही है। मेट्रो शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में आसानी से कम वेतन पर काम करने को युवा तैयार हैं। वहीं, वर्क फ्रॉम होम ने सर्विस सेक्टर के लिए घर से काम करने की राह खोल दी है। इसको देखते हुए कंपनियां छोटे शहरों का रुख कर रही हैं। वहां उनको कम लागत में अच्छे कर्मचारी आसानी से मिल रहे हैं।

इन शहरों में सबसे अधिक मौके

रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ, जयपुर, नासिक, गुवाहाटी, रांची, राजकोट, नागपुर, इंदौर आदि शहरों में सबसे अधिक नियुक्तियां अभी है। इसके साथ ही कंपनियां दूसरे छोटे शहरों में अपने काम को विस्तार देने की योजना बना रही है। कोरोना के बाद कंपनियों को लग गया है कि सिर्फ मेट्रो शहरों के सहारे टिके रहना सही नहीं है। इसलिए अब वह टियर टू और थ्री शहरों पर फोकस बढ़ा रही हैं।

दांव खेल रहीं ई-कॉमर्स कंपनियां

कोरोना संकट में मिले अवसर को भुनाने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां छोटे शहरों पर बड़ा दांव लगा रही हैं। वे इन शहरों के व्यापक कंज्यूमर बेस का लाभ उठाने के लिए अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। इससे ई-कंपनियों की छोटे शहरों में नियुक्तियों में 15 प्रतिशत तक तेजी आने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहर देश में खुदरा कारोबार वृद्धि के भविष्य के केन्द्र हैं। इन शहरों में जमीन सस्ती दर पर उपलब्ध है, किराया कम है और ग्राहक भी नए स्टोरों को लेकर नए अनुभव के लिए तैयार हैं।

दोनों के लिए फायदे की स्थिति

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना पूर्व तक अधिकतर नौकरियां देश के 15 से 20 बड़े महानगरों तक सीमित थी लेकिन अब स्थिति बदल रही है। अब कंपनियां छोटे शहरों की ओर रुख कर रही है क्योंकि उन्हें आसानी से कम लागत में अच्छे कर्मी मिल रहे हैं। वास्तव में शहरों में नौकरी करने आने वाले में 30 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों से आते हैं। उनकों अपने शहर में जॉब मिलने से पलायन नहीं करना होगा। वो वहां कम वेतन पर भी काम करने को तैयार हैं।

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