दुर्योधन का एक भाई जो महाभारत में पांडवों की तरफ से लड़ा था

महाभारत के युद्ध में कई ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कौरवों और पांडवों का साथ दिया था लेकिन दुर्योधन का भाई विकर्ण महाभारत का एक ऐसा योद्धा था जिसने अपने भाई दुर्योधन को छोड़कर पांडवों की तरफ से युद्ध लड़ा था। विकर्ण कौरवों का ऐसा एक ऐसा भाई था जो हमेशा धर्म का साथ देता था तथा धार्मिक नीति पर चलता था।

जब पांडव जुए मे सब कुछ हार गए थे तो उन्होंने द्रोपदी को दाव पर लगा दिया था। जब दुर्योधन द्रोपदी का अपमान कर रहा था तो विकर्ण ने दुर्योधन के खिलाफ आवाज उठाई थी। लेकिन दुर्योधन के मामा शकुनी विकर्ण को चुप करा दिया था क्योकि वह दुर्योधन का छोटा भाई था।

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विकर्ण एक धर्मी राजा होने के साथ साथ एक महान धनुर्धर भी था। जब कौरव के गुरु द्रोणाचार्य ने राजा द्रुपद को हराने की गुरु दक्षिणा मांगी थी। विकर्ण ने द्रुपद की सेना का डटकर सामना किया था।किंतु दुर्योधन की कमजोर रणनीति के कारण दुर्योधन राजा द्रुपद से युद्ध हार गया था।

जब महाभारत युद्ध लड़ा जा रहा था तो श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के बीच में जाकर अपने-अपने पक्ष बदलने के लिए योद्धाओं से कहा तो विकर्ण ही एक ऐसा ऐसा योद्धा था जो कौरवों की सेना से निकलकर पांडवों की सेना में आ गया था और पांडवों की तरफ से युद्ध लड़ा था

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