दुर्योधन को मिला था यह श्राप जिसके कारण हुआ था महाभारत का युद्ध

आप सभी महाभारत के बारे में तो अच्छे से जानते होंगे और इस इस खबर के बाद में आप और भी अच्छे से जान जायेंगे. महाभारत धर्म और अधर्म के बीच में लगा गया था. और इस युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवो का साथ दिया.

महाभारत में दुर्योधन को एक घमंडी और कपटी राजा बताया जाता है किंतु दुर्योधन पराक्रमी और महान योद्धा था। दुर्योधन को अपने घमंड के कारण एक श्राप लग गया था जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। दोस्तों एक बार महर्षि मैत्री हस्तिनापुर आए हुए थे हस्तिनापुर में धृतराष्ट्र ने मैत्री ऋषि के लिए आराम की संपूर्ण व्यवस्था कर रखी थी।

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जब महर्षि आराम से उठें तो धृतराष्ट्र ने पांचों पांडवों के बारे में पूछा तब ऋषि ने पांडवों की कुशलता बताते हुए धृतराष्ट्र से कहा कि तुम्हारे पुत्रों ने पांडवों के साथ बुरा किया है। जब यह बातें चल रही थी तभी दुर्योधन पीछे से आ गया। ऋषि ने दुर्योधन से कहा कि तुम जानते हो पांडव कितने शक्तिशाली और वीर हैं।

यह बात सुनकर दुर्योधन बहुत क्रोधित हो गया और उसने क्रोध में अपनी जांघ पर हाथ से ताल ठोक दी। दुर्योधन की उद्दंडता को देख कर महर्षि को गुस्सा आ गया और उसने दुर्योधन को श्राप दिया की जिस उद्दंडता के साथ तूने जांघ पर ताल ठोक है।

वही जांघ एक दिन पांडव तोड़ देंगे और इस श्राप के बाद दुर्योधन ने ऋषि से माफी भी मांगी थी लेकिन ऋषि ने दुर्योधन की बात नही सुनी थी। इस श्राप के कारण महाभारत जैसा युद्ध हुआ था और उसमे भीम ने दुर्योधन की जांघ तोड़ दी थी जिसमे दुर्योधन की मृत्यु हो गयी थी।

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