महाभारत का एक ऐसा योद्धा जिसने भीम को 3 बार पराजित करके जीवनदान दे दिया था

आप सभी महाभारत के युद्ध के बारे में अच्छे से जानते है. और इस युद्ध को धर्मयुद्ध के नाम से भी जाना जाता है. आप सभी अच्छे से जानते है. इस युद्ध में पांडव और कौरव आमने – सामने युद्ध कर रहे थे. अंत में इस युद्ध में कौरवों की हार हुई और पांडवों की जीत हुई.

इस युद्ध में भीम का सामना 3 बार एक योद्धा से हुआ था और तीनो बार हारने के बाद भी इस योद्धा ने भीम को जीवनदान दे दिया था. आज की हमारी इस खबर में हम आपको उसी योद्धा के बारे में बता रहे है.

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जी हाँ, हम बात कर रहे हैं सूर्यपुत्र कर्ण की. कर्ण जैसा शक्तिशाली योद्धा अन्य कोई भी न था. उन्होंने हज़ारों हाथियों का बल रखने वाले भीम एक नहीं बल्कि नही तीन बार युद्ध में हराया था.

दरअसल कर्ण माता कुंती के पुत्र थे और पांडवों के ज्येष्ठ भ्राता थे. महाभारत युद्ध से पहले ही उनकी भेंट कुंती से हुई थी. कर्ण ने अपनी माता कुंती को वचन दिया था कि वे कुंती के चारो पुत्रों को सदा जीवनदान देंगे. इसी कारण भीम को तीन बार हारने के पश्चात भी कर्ण ने उन्हें तनिक भी हानि न पहुंचाई. इसके पश्चात भीम लज्जित होकर अर्जुन के पास पहुंचे. और कर्ण को शीघ्र पराजित करने को कहा. महाभारत में कर्ण और अर्जुन का युद्ध हुआ. श्रापों के चलते कर्ण को विवश होना पड़ा और युद्धभूमि में वे वीरगति को प्राप्त हुए.

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