साल 2019 में चीन ने भारत पर किए 2 लाख साइबर हमले, देश को इतने लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

भारत टेक्नोलॉजी की राह पर तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। लेकिन इस रफ्तार की राह में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के तौर पर उभरा है, जिससे देश को सालाना अरबों रुपये का नुकसान हो जाता है। भारत में साइबर अपराध बढ़ने की कई वजह हैं। साथ ही भारत ने सारबर अपराध को कम करने की दिशा में तमाम तरह के काम किये जा रहे हैं। हमने भारत की साइबर सिक्योरिटी को लेकर Europ Assistance India के सीईओ Ram Seethepalli से बातचीत की, जिन्होंने भारत में साइबर अपराध की दुनिया के बारे में विस्तार से बताया। इस इस बातचीत को विस्तार से जानते हैं।

भारत में साइबर सुरक्षा की स्थिति के बार में बताएं? एक व्यक्ति और संगठनों को हर साल साइबर धोखाधड़ी के कारण कितना नुकसान होता है?

भारत में अभी लगभग 1.2 बिलियन मोबाइल अकाउंट हैं और आधे बिलियन से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं। 2018 में भारतीयों ने सामूहिक रूप से 12 बिलियन से ज्यादा मोबाइल ऐप डाउनलोड किए। भारत तेजी से डिजिटल भुगतान तकनीक की ओर बढ़ रहा है, जिसमें UPI और अन्य मोबाइल वॉलट यूजर्स की लाइफ अभिन्न भूमिका निभा रहे हैं। भारत उन शीर्ष देशों में भी शामिल है, जो सबसे ज्यादा साइबर-हमलों और साइबर-धोखाधड़ी के मामलों का सामना करता है। यह चलन महामारी और लॉकडाउन के दौरान बढ़ गया है, जब लोगों ने बड़ी संख्या में वर्चुअल और टचलेस भुगतान पेमेंट का उपयोग शुरू किया। भारत 2019 में अकेले चीन से दो लाख से अधिक साइबर हमले किये गए और यह आंकड़ा लॉकडाउन के पहले तीन महीनों के ही बढ़ गया। 2020 के पहले नौ माह में साइबर अपराध के से करीब 6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुमानित नुकसान हुआ है, जबकि प्रति व्यक्ति औसत नुकसान 4,552 रुपये रहा।

साइबर अपराधी तीन तरीकों से हमला करने और सूचना एकत्र करने की योजना बनाते हैं।

प्राथमिक तकनीक कंपनियों के सर्वर स्तर पर हमलों की है। एक बार सर्वर स्तर के हमलों को अंजाम देने के बाद, अपराधी उस जानकारी को डार्क वेब पर बेचते हैं। कभी-कभी कई खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग किया जाता है और इसलिए हैकर उसी व्यक्ति के अन्य खातों पर भी हमला कर सकता है।
दूसरे प्रकार का हमला फ़िशिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर आदि के माध्यम से मोबाइल और लैपटॉप उपकरणों पर होता है ।
तीसरा तरीका घोटाले से संबंधित है। ये हमलावर विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कॉल करने का नाटक करते हैं और ऑफ़र और छूट के बहाने उपभोक्ता को अपुष्ट जानकारी देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अच्छा-खासा वित्तीय नुकसान हो सकता है।
साइबेरियर क्या है और इस समाधान को विकसित करने के पीछे क्या सोच थी?

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