LAC पर सेना की खास तैयारी, चीन को मिलेगा हर चाल का करारा जवाब

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव पर बयान दिया है. गलवान घाटी और पैगोंग झील के दक्षिणी इलाके में हुई घटना के बाद पहली बार सरकार ने संसद में पूरी जानकारी दी है. लोकसभा में आज राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और सेना के जवान मातृभूमि की रक्षा में मजबूती के साथ तैनात हैं. संसद में रक्षा मंत्री ने चीन के बारे में पांच बड़ी बातें बताईं.

सबसे पहले उन्होंने बताया कि 29 और 30 अगस्त की रात में चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की तरफ से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन हमारे सैनिकों ने उनके प्रयास विफल कर दिए.

– राजनाथ सिंह ने 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा पर भी संसद को जानकारी दी और बताया कि गलवान में हमारे जवानों ने चीन की सेना को भारी नुकसान पहुंचाते हुए सीमा की सुरक्षा की है.

– रक्षा मंत्री के मुताबिक इस वर्ष अप्रैल महीने से लद्दाख की सीमा पर चीन के सैनिकों और हथियारों की संख्या लगातार बढ़ी है. रक्षामंत्री के मुताबिक LAC पर तनाव है क्योंकि चीन ने अपने इलाके में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद इकट्ठा कर रखा है और इसके जवाब में भारत ने भी पूरी तैयारी की है.

– राजनाथ सिंह ने संसद में बेहद जरूरी एक बात बताई. उनके मुताबिक Line Of Actual Control यानी LAC पर भारतीय सेना पूरी तरह से अलर्ट है और जरूरत के हिसाब से एक्शन लेने के लिए तैयार है.

– चीन की सेना ने जब LAC पर भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोकने की कोशिश की और उससे टकराव की स्थिति पैदा हुई.

– राजनाथ सिंह ने बताया कि चीन लद्दाख में LAC में बदलाव करना चाहता है. इसी मकसद से चीन की सेना लगातार अतिक्रमण की कोशिश कर रही है.लेकिन भारतीय सेना उसे जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है.

रक्षा मंत्री ने चीन को लेकर भारत के 3 सिद्धांत बताए
राजनाथ सिंह ने संसद से विपक्षी दलों और सरकार के संकल्प पर शक करने वालों को भी मैसेज दिया है. उन्होंने कहा कि देश की संसद को एक स्वर में यह संदेश देना चाहिए कि पूरा देश सेना के साथ मजबूती से खड़ा है. इसके बाद रक्षा मंत्री ने चीन को लेकर भारत के 3 सिद्धांत बताए.

– पहला सिद्धांत यह है कि दोनों पक्षों को वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC का सम्मान करना चाहिए.

– दूसरा यह कि किसी भी पक्ष को एकतरफा तरीके से LAC के उल्लंघन की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

– तीसरा सिद्धांत यह कि दोनों देशों के बीच सभी मौजूदा समझौतों का पालन होना चाहिए.

चीन के विस्तारवाद के खिलाफ दूसरा मोर्चा कूटनीति का
चीन के विस्तारवाद के खिलाफ दूसरा मोर्चा कूटनीति का है. यहां पर भी भारत लगातार उसकी चालों का जवाब दे रहा है. हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत चीन को टक्कर देने वाली ताकत के तौर पर उभर रहा है.

– एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र की Economic & Social Council में भारत ने अपनी जगह बना ली है

– भारत अगले चार वर्षों तक इस परिषद का सदस्य बना रहेगा.

– इस सीट को पाने के लिए भारत, चीन और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला था.

– भारत और अफगानिस्तान को 54 में से अधिकतर सदस्यों का साथ मिला, जबकि चीन के साथ किसी महत्वपूर्ण देश ने नहीं दिया.

भारत की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव
पिछले कुछ समय में भारत की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है. अब तक भारत को विदेश नीति के मामले में Elephant यानी हाथी कहा जाता था. लेकिन अब भारत की विदेश नीति में हाथी के बजाय शेर की तरह आक्रामक हो चुकी है.

– पहले भारत की विदेश नीति में बदलाव की प्रक्रिया बहुत धीमी हुआ करती थी. अब इसमें मौके और जरूरत के हिसाब से तेजी से बदलाव हो रहे हैं.

– पहले विश्व के मंच पर भारत किसी हाथी की तरह एक साइलेंट प्लेयर यानी मौन खिलाड़ी की तरह रहता था. लेकिन अब वो एक्टिव है और अपनी उपस्थिति दुनिया को बताता भी है.

– हाथी ताकतवर होने के बावजूद आक्रामक नहीं होता है लेकिन शेर शक्तिशाली और आक्रामक दोनों होता है. ऐसे में ये तुलना अब भारत के लिए ज्यादा सटीक मालूम होती है.

– शेर कभी भी अपने मन के भाव को चेहरे पर नहीं दिखाता है. आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन का नाम लिये बिना ही विस्तारवाद पर प्रहार किया था.

चीन ऐसा देश है जो ताकत की भाषा ही समझता है. अब तक वो भारत के साथ दादागीरी करता रहा है. लेकिन पिछले कुछ महीनों में परिस्थितियां तेजी से बदल चुकी हैं. अब चीन समझौतों और यथास्थिति की बातें करने लगा है. भारत की तरफ से बने कूटनीतिक दबाव के कारण ही चीन अब भारत को उन समझौतों और संधियों की याद दिलाने लगा है, जिन्हें वो खुद समय-समय पर तोड़ता रहा है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने आज एक और बयान जारी किया है. आपको यह बयान सुनाते हैं ताकि आप समझ सकें कि लद्दाख की घटनाओं के बाद से चीन किस हद तक दबाव में है.

चीन के खिलाफ भारत का सैन्य मोर्चा
इस बीच लद्दाख में भारतीय सेना सर्दियों के लिए तैयारी कर रही है. सर्दियों में लद्दाख का तापमान माइनस 40 डिग्री तक चला जाता है. ऐसे समय में राशन, हथियार और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई एक बड़ी चुनौती होती है। भारतीय सेना ने आज लद्दाख में एक बड़ा अभ्यास किया. जिसमें आने वाले समय के लिए तैयारियों का ड्राई रन किया गया. ये चीन के खिलाफ भारत का सैन्य मोर्चा है. जिसके बारे में आपको बताने के लिए ZEE NEWS की टीम इस समय लद्दाख में है और वहीं से आपके लिए, हमने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट तैयार की है.

भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोबमास्टर लगातार रसद और सेना के लिए जरूरी सामान लेह एयरपोर्ट पहुंचा रहे हैं.

इस सामान को दुर्गम इलाकों तक जल्द पहुंचाने का काम वायुसेना के शिनूक हेलीकॉप्टर कर रहे हैं. ताकि 16 और 17 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद जवानों को सर्दी से बचाया जा सके. शिनूक हेलीकॉप्टर एक बार में 10 टन तक सामान ले जा सकते हैं.

और इस मिशन को सुरक्षित रखने के लिए आसमान में सुखोई 30 एमकेआई फाइटर जेट भी मौजूद हैं.

भारतीय सैनिक LAC पर चीन के सैनिकों के मुकाबले टॉप पर हैं और सर्दियों में भी वो अपनी जगह पर तैनात रहें, इसके लिए हर जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं.

ऊंचाई पर तैनात सैनिकों के लिए सर्दियों की खास तैयारी
सर्दियों में लद्दाख के कई इलाकों का तापमान माइनस 40 डिग्री तक पहुंच जाता है. अगले 7 से 8 महीनों तक सैनिकों को खास टेंट की जरूरत होगी. इनके अंदर हीटर की मदद से तापमान आरामदायक रहेगा और सैनिकों को कोई परेशानी नहीं होगी. इस ऊंचाई पर हर सैनिक को सर्दी से बचकर देश की सुरक्षा करते रहने के लिए कुल 21 आइटम दिए गए हैं. इनमें तीन लेयर के गर्म कपड़े, तीन लेयर के दस्ताने-मोजे और गर्म टोपी शामिल है. सैनिकों को से फ्रॉस्ट बचाने के लिए खास तरह के जूते भी दिए गए हैं.

कोई भी फौज बिना भोजन के एक कदम नहीं चल सकती है. ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को खासतौर पर सर्दियों में हाई कैलोरी वाले विशेष राशन की जरूरत होती है. आर्मी सर्विस कोर ने जवानों के लिए शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही तरह के भोजन की व्यवस्था की है. इनमें सूखे मेवे, चाकलेट्स, रेडी टू ईट खाने के पैकेट और सूखी मिठाइयां जैसी चीजें हैं.

आपको जानकर गर्व होगा कि लेह में भारतीय सेना के लिए सभी जरूरी चीजें इतनी मात्रा में इकट्ठा कर ली गई है, जो अगले 14 महीने के लिए पर्याप्त होंगी. यानी सर्दियों की शुरुआत होने से पहले ही भारतीय वायुसेना की तैयारी पूरी हो चुकी है.

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