चार्ल्स चक: अमेरिका का वो स्नाइपर, जिसने 30 सेकंड में उड़ाए 16 दुश्मनों के सिर!

घंटों तक एक ही जगह पर बिना हिले बैठे रहना. ऊँगली राइफल के ट्रिगर पर और आँखें राइफल के ऊपर लगे स्कोप पर लगाए रखना. जैसे ही दुश्मन दिखे, तो एक गोली में उसका सिर उड़ा देना. ये काम सिर्फ एक खतरनाक स्नाइपर ही कर सकता है.

हालांकि, अगर कहा जाए कि घंटों नहीं चंद सेकंड्स में 16 दुश्मनों के सिर को उड़ाने हैं, तो ये काम सिर्फ चार्ल्स चक ही कर सकते हैं और कोई नहीं.

वियतनाम के युद्ध में जहां अमेरिकी सैनिक जंगल में कुछ देख भी नहीं पा रहे थे, वहां चार्ल्स दुश्मन को खोज-खोज के मार रहे थे.

तो चलिए जानते हैं कि कैसे वियतनाम के युद्ध में उन्होंने खुद को बनाया अमेरिका का एक सबसे खतरनाक स्नाइपर–

पिता की राह पर चल, गए सेना में

अमेरिका में पले-बढ़े चार्ल्स का बचपन से सपना था कि वह अपने पिता की तरह खुद को सेना की वर्दी में देखें. उनके पिता दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका की ओर से लड़ चुके थे. चार्ल्स भी चाहते थे कि उनको भी अपने देश के लिए जंग में जाने का मौका मिलें.

इसके लिए उनके आगे सेना में भर्ती होने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं था. इसलिए चार्ल्स ने बचपन से ही खुद को सेना के लिए तैयार करना शुरू कर दिया.

चार्ल्स ने 1967 में अपना स्कूल ख़त्म ही किया था कि उन्होंने खुद को मरीन ट्रेनिंग में भर्ती कर लिया. वहां पर ही उन्होंने सीखा कि आखिर स्नाइपर बनना क्या होता है.

जब उन्हें स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही थी, तो उन्होंने सोच लिया था कि वह भी एक स्नाइपर ही बनेंगे. कहते हैं कि अपने बैच में उन्होंने इतनी ट्रेनिंग की, कि हर कोई हैरान हो गया. उनके निशाने दिन ब दिन और भी घातक होते जा रहे थे.

उन्होंने अपनी ट्रेनिंग ख़त्म ही की थी कि उन्हें वियतनाम युद्ध में जाने का आदेश मिल गया. ये सुनते ही चार्ल्स की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था. वह देश के लिए जंग में जाना चाहते थे और आखिर उन्हें वह मौका मिल ही गया.

वह 1 मरीन डिवीज़न में राइफलमैन के तौर पर उनसे जुड़े और जल्द ही सेना के प्लेन से उन्हें वियतनाम भेज दिया गया.

जहां कई सैनिक वियतनाम के खतरनाक जंगलों में लड़ने से घबरा रहे थे. वहीं दूसरी ओर चार्ल्स खुशी मना रहे थे क्योंकि किसी भी स्नाइपर के लिए इससे बढ़िया मौका नहीं हो सकता अपनी स्किल्स चेक करने का.

अब उन्हें बस इंतज़ार था मिशन पर जाने का.

चार्ल्स की गोली से कोई नहीं बच पाया…

जिस चीज का चार्ल्स को इंतज़ार था आखिर वह उनके सामने आ ही गई. उनकी टीम को मिशन पर भेज दिया गया. चार्ल्स ने अपने लिए एक M-40 स्कोप राइफल चुनी. वह जानते थे कि यह तेजी से गोली दागने वाली बंदूक ही वियतनाम के जंगलों में उनकी मदद करेगी.

वियतनाम के जंगलों में लड़ना बहुत ही मुश्किल काम होता था. वहां पर दुश्मन कब और कहाँ से आ जाए कोई नहीं जानता था. ऐसे में हर टीम के पास एक स्नाइपर होता था, जो दूर बैठकर अपनी टीम को कवर देता था.

चार्ल्स का भी यही काम था. जब उनकी टीम नदी या घना रास्ता पार रही होती थी, तो वह कहीं छिप के पूरे इलाके पर नजर रखते थे.

ऐसे में कई बार उनके सामने दुश्मन आए, तो कई बार चार्ल्स ने ही उन्हें ढूंढ लिया. कहते हैं कि उस समय एक दुश्मन को छोड़ना मतलब अपने साथियों के मरने के चांस को बढ़ाना होता था. ऐसे में चार्ल्स ने खुद के लिए एक नियम बनाया था कि वह किसी भी दुश्मन को बचकर नहीं जाने देंगे.

इतना ही नहीं इसमें सबसे मुश्किल चीज थी एक ही गोली में दुश्मन का सफाया करना. इसके लिए बहुत ही धैर्य की जरूरत थी और बहुत अच्छे निशाने की भी. अगर पहली गोली मिस हो जाती, तो दुश्मन चौकन्ना हो जाता और भाग जाता. आगे चलकर वही उनकी टीम के किसी साथी को मारने का कारण बन सकता था.

इसलिए यह काम एक ही गोली में करना था, फिर चाहे सुबह हो या रात. चार्ल्स ने ऐसा किया भी. उन्होंने जहां दुश्मन को देखा उसे मार गिराया.

उन्होंने ये नहीं देखा कि सामने किस उम्र का व्यक्ति है… अगर उसके हाथों में बंदूक है, तो वह खतरा है. इसके बाद चार्ल्स ने धीरे-धीरे ऐसी जगहों पर दुश्मन को मार गिराया जहां किसी को उम्मीद भी नहीं थी.

उनका निशाना एक बार भी नहीं चूका. एक गोली पर उन्होंने एक दुश्मन मार गिराया.

1000 गज दूर से भी साधा सही निशाना!

एक स्नाइपर के लिए सबसे मुश्किल काम होता है बहुत ज्यादा दूर से भी सही निशाना लगाना. ऐसा इसलिए क्योंकि दूरी के कारण हवा बदल जाती है और गोली निशाने से चूक जाती है.

वहीं वियतनाम के जंगलों में जहां पर हवा हर पल बदलती रहती है वहां पर तो सही निशाना लगाना नामुमकिन सा हो जाता है. हालांकि, इस नामुमकिन को भी चार्ल्स ने सच करके दिखा दिया.

अपने शॉट के लिए उन्होंने कई-कई देर तक दुश्मन के आने का इंतजार किया. जब तक पूरी स्थिति उनके अनुकूल नहीं हुई तब तक उन्होंने गोली नहीं चलाई.

जितना ज्यादा चार्ल्स वियतनाम के जंगलों में वक्त बिता रहे थे उतना ज्यादा उनके निशाने खतरनाक होते जा रहे थे. पहले वह 300 गज की दूसरी से निशाना लगते थे. आगे चलकर उन्होंने इसे सीधा दोगुना कर 800 गज कर दिया.

इतना ही नहीं कहते हैं कि कई बार तो उन्होंने 1000 गज से भी दूर खड़े व्यक्ति को अपनी एक गोली से जमीन पर गिरा दिया! उनके ये कारनामे देख उनकी टीम के लोग हैरान हो जाते थे.

किसी को समझ नहीं आता था कि आखिर चार्ल्स ये कैसे कर लेते हैं. वहीं दूसरी ओर चार्ल्स की डेथ लिस्ट रोजाना बढ़ती ही जा रही थी. इससे पहले कोई अमेरिकी स्नाइपर इतनी तेजी से लोगों को नहीं मार पाया था. चार्ल्स ऐसा करने वाले पहले अमेरिकी मरीन थे.

30 सेकंड में उड़ाए 16 सिर!
उस दिन वैलेंटाइन डे था. जहाँ दुनिया एक ओर इस प्यार के दिन को मना रही थी. वहीं दूसरी ओर चार्ल्स और उनके साथी मौत के रास्ते पर चल रहे थे.

रात का समय था और उस अँधेरे में उनकी टीम एक नदी पार कर रही थी. चार्ल्स हमेशा की तरह अपनी राइफल लेकर दूर खड़े थे और इलाके पर नजर रख रहे थे.

रात के लिए उन्होंने अपनी बंदूक बदल दी थी. अब उनके पास एक M-14 राइफल थी नाईट विज़न स्कोप के साथ.

चार्ल्स की टीम आगे बढ़ रही थी कि तभी चार्ल्स ने देखा कि नदी के दूसरी छोर से कई वियतनामी बंदूकों के साथ आगे बढ़ रहे हैं…

चार्ल्स को समझ आ गया कि वह उनकी टीम पर हम करने की फ़िराक में हैं. उन्होंने तुरंत ही अपनी बंदूक उठाई और दुश्मन की ओर की.

समय बहुत कम था और एक-एक सेकंड जरूरी था. एक चूक और उनकी पूरी टीम खत्म हो सकती थी. अब सब चार्ल्स के हाथों में था.

चार्ल्स ने एक गहरी सांस ली और तैयार हो गए अपने पहले शॉट के लिए. उन्होंने ट्रिगर दबाया और गोली सीधा जाकर वियतनामी सैनिक के सिर में लगी. गोली की आवाज़ सुनते ही हर कोई सतर्क हो गया मगर चार्ल्स ने दुश्मन को कुछ करने का मौका ही नहीं दिया.

इसके बाद उन्होंने एका-एक गोलियां चलाईं. करीब 30 सेकंड बाद चार्ल्स ने गोलियां चलाना बंद किया और तब तक उन्होंने आधे से ज्यादा वियतनामियों को मौत के घाट उतार दिया था.

उन 30 सेकंड में उन्होंने 16 गोलियां चलाई थीं और वह 16 सीधा दुश्मन के सिर पर जाकर लगीं. न सिर्फ चार्ल्स ने उस दिन अपनी टीम की जान बचाई बल्कि स्नाइपर की दुनिया में इतिहास भी रच दिया.

आज से पहले इतने कम समय में किसी स्नाइपर ने इतने सारे हेडशॉट नहीं लिए थे. ये कारनामा सिर्फ चार्ल्स के हाथों हो पाया था.103 दुश्मनों को मारने के बाद लौट घर
उस रात जो चार्ल्स ने किया था वह उनकी टीम ने कभी किसी को करते हुए नहीं देखा था. हर कोई जान गया था कि वियतनाम से चार्ल्स से बढ़िया स्नाइपर उन्हें कोई और नहीं मिल सकता है.

उन्होंने हर छोटे और बड़े मिशन पर सिर्फ चार्ल्स को लेजाना शुरू किया. चार्ल्स भी इस काम में पूरी तरह से डूब चुके थे. कई महीने हो गए थे और वह वियतनाम से वापस अपने घर ही नहीं जा रहे थे.

वह तो सीधा जंग ख़त्म होने के बाद ही वापस आना चाहते थे. जितना ज्यादा वह वियतनाम में रुके उतना ज्यादा उनके हाथों मरने वालों की संख्या बढ़ती जाती.

करीब एक साल बाद चार्ल्स को सेना ने वापस घर जाने का आदेश दे दिया. वह नहीं चाहते थे कि चार्ल्स वहां रहकर खुद को पूरी तरह से हिंसा में झोंक दें. इसलिए उन्होंने चार्ल्स को वापस अमेरिका भेजने का बंदोबस्त कर दिया.

चार्ल्स को वहां पर करीब एक साल हो गया था. इस एक साल में उन्होंने 103 से भी ज्यादा दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया था.

जब वह वापस अमेरिका गए, तो उनकी 30 सेकंड में 16 हेडशॉट वाली बात फैल चुकी थी. हर तरफ चार्ल्स के चर्चे थे. वापस जाने के बाद भी चार्ल्स सेना से दूर नहीं हुए. उन्होंने रिटायरमेंट नहीं ली और सेना में निशानेबाजी सिखाने का काम करने लगे.

आज भी स्नाइपरों को चार्ल्स के कारनामों की कहानी सुनाई जाती है.

वैलेंटाइन डे की उस रात चार्ल्स ने वह काम कर दिखाया जिसकी चर्चा आजतक होती है. आज भी उनके इस रिकॉर्ड को कोई नहीं तोड़ पाया है. आज भी ये अजूबा चार्ल्स के नाम ही दर्ज है.

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