Happiest Minds IPO: शेयर बाजार में 13 साल बाद फिर चमके अशोक सूता, 77 की उम्र में दिखाया ‘हैप्पिएस्ट माइंड’ का दम

Happiest Minds IPO: शेयर बाजार में 13 साल बाद फिर चमके अशोक सूता, 77 की उम्र में दिखाया ‘हैप्पिएस्ट माइंड’ का दम

जब सूता ने प्रेमजी की नौकरी छोड़ी और घंटे भर में कर लिया 100,00000 डॉलर का जुगाड़

Covid-19 के बावजूद हैप्पीएस्ट माइंड्स का 76 परसेंट रेवन्यू जस का तस रहा। इसने अशोक सूता को हौसला दिया और वो आगे बढ़े। आज आईपीओ 151गुना सब्सक्राइब हो चुका है। किसी भी वक्त निवेशकों के डी-मैट अकाउंट में शेयर अलॉट (Happiest Minds Share Price) हो जाएंगे। देश को करोड़ों निवेशकों की नज़रें इस पर टिकी हैं कि 17 सितंबर को शेयर बाजार में कंपनी का शेयर किस भाव पर ट्रेड करेगा।

अशोक सूता को इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की नई कंपनी बनाने का खयाल माइंड ट्री में रहते आया। माइंडट्री और हैप्पीएस्ट माइंड्स दोनो आईटी सेवा देने वाली कंपनियां थीं। दोनों ने तकनीकी बदलाव को अपनाया जिससे मांग की बाढ़ आ गई। जब अशोक और उनके सह संस्थापकों ने 1999 में माइंडट्री लॉंच किया तब इंटरनेट के विस्तार ने डॉट कॉम क्रांति ला दी थी। इसने उन्हें ई-सिस्टम इंटीग्रेटर के तौर पर बाजार में घुसने में मदद की और आगे चल कर माइंड ट्री भारतीय कंपनियों ही नहीं बल्कि अमेरिकी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने लगी।

उसकी टक्कर सीएंट, वायंट, लांट और बाकी दर्जनों और कंपनियों से होने लगी। साथ ही माइंड ट्री भारत से सेवा दे रही थी इसलिए लागत में काफी कमी आई। नतीजतन छह महीनों के भीतर माइंडट्री का पूरा खर्चा उसकी आमदनी के बराबर हो गया और वो मुनाफे की स्थिति में आ गई। डॉट कॉम कारोबार ध्वस्त होने के बाद कहानी अलग है पर माइंड ट्री लगभग सौ ई सिस्टम इंटीग्रेटर कंपनियों में इकलौती कंपनी थी जिसने इसे झेला और आईपीओ लाई।

इंटरनेट का गुब्बारा फूटने के अगले दशक में कई नई तकनीकें आईं जिनमें सोशल मीडिया, मोबिलिटी, एनालिटिक्स और क्लाउड (सबको मिलाकर SMAC) शामिल है. इन तकनीकों के बाद यूनिफाइड कम्युनिकेशंस, बिग डेटा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT),आर्टिफिशिलय इंटेलिजेंस, कॉग्निटिव कंप्यूटिंग का दौर आया। इन नई तकनीकों ने स्टार्ट अप कंपनियों को अपने प्रोडक्ट के सेवाओं के तौर पर डेलिवर करने , बहुमाध्यमी क्षमता बनाने और अपना आधारभूत संरचना खर्च घटाने में मदद की। हैप्पीएस्ट माइंड्स के लिए SMACPLUS सॉल्यूशंस ही बुनियाद रहा।

इंटरनेट को कस्टमर और कंपनी से जोड़ने की कोशिश

हालांकि इंटरनेट ने 100 से ज्यादा आईटी सेवा कंपनियों को पैदा किया लेकिन तमाम तकनीकी बदलावों के बावजूद कोई नई भारतीय कंपनी पटल पर नहीं आई जो नई तकनीकों को आत्मसात कर डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन सॉल्यूशन दे सके। इसने हैप्पीएस्ट माइंड्स को डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन सर्विस प्रदाता के तौर पर उभरने में मदद की। शायद ये पहली कंपनी थी जिसी सारी कमाई या राजस्व ट्रांसफॉरमेशन सेवा से आता था। इसमें ग्राहकों का अनुभव बदलना, किसी प्रोडक्ट को सेवा की तरह पहुंचाना और डिजिटल वातावरण में लचीला बुनियादी संरचना विकसित करने में मदद करना शामिल है।

स्मैकपल्स तकनीक के अलावा इंटरनेट भी लगातार विकास करता रहा है। वेब 1.0 से लेकर वेब 5.0 तक ये बढ़ता रहा है। इंटरनेट का अविष्कार टिम बर्नर्स ली ने किया और इसका पहला संस्करण सिर्फ पठनीय था। वेब 1.0 स्टैटिक प्रकाशन वाला युग था। इसी समय गूगल, याहू, रिडिफ्यूजन जैसी कंपनियों ने कदम बढ़ाए. इससे ई-कॉमर्स शुरू हुआ और अमेजन जैसे खुदरा कारोबार करने वाली कंपनियों का जन्म हुआ। वेब 2.0 भागीदारी वाली तकनीक लेकर आया।कंटेंट मिलजुल कर बनाया जा सकता था और वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता था।

वेब 2.0 के जमाने में ट्विटर, यू ट्यूब, फेसबुक और वीकिपीडिया का जन्म हुआ। वैश्विक स्तर पर कई मीडिया संग्राहक कंपनियों का जन्म भी वेब 2.0 के कारण हुआ। वेब 3.0 को इंटेलिजेंट वेब माना गया। इससे यूजर और वेब एप्लीकेशन के बीच संवाद शुरू हुआ। यूजर आपसी संवाद और गठजोड़ करने लगे और कई वेब सेवाओं का प्रादुर्भाव हुआ। नोवा स्पाइवैक के मुताबिक वेब 3.0 एक ऐसा मानक है जिसने वेब को विशालकया डेटा बेस के तौर पर स्थापित किया. वेब 3.0 के जरिए 3 डी पोर्टल जैसे एप्लीकेशन सामने आए।

वेब 4.0 वेब 3.0 का ही अगला संस्करण है। अब वेब गतिमान परिवेश से लगातार कनेक्ट रहने लगा और वेब को सभी डिवाइस से कनेक्ट करना मुमकिन हुआ। वास्तविक और आभासी दुनिया एक दूसरे के पास आ गई। आप मोबाइल वेब के जरिए हजारों कारोबार को होता हुआ देख सकते हैं। 3 डी फोटो और मेडिकल एप्लीकेशन आ गए जिसमें कोई दिव्यांग भी अपनी सोच के हिसाब से कंप्यूटर ऑपरेट कर सकता है।

अंत में वेब 5.0 अभी विकसित हो ही रहा है। ये खुला है, लिंक्ड है और भावुक है। आज उद्यमी स्मैक, बिग डेटा, आईओटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कॉग्निटिव कंप्यूटिंग को भावनात्मक व्याख्या से जोड़ कर नए कारोबार कर रहे हैं। इसके लिए वेब 5.0 को ही आधार बनाया गया है। इन एप्लीकेशन के प्रयोग से यूजर की भावना और सोच को कैप्चर किया जा सकता है। ये उद्यमियों के निर्णय लेने की क्षमता में सहायक साबित हो रहा है।

 

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